संकाय

शोध आचार

शोध कदाचार में राष्‍ट्रीय प्रतिरक्षाविज्ञान संस्‍थान के वैज्ञानिक समुदाय के किसी सदस्य द्वारा किसी के डेटा का गढ़ना (कभी भी प्रयोग नहीं किया जा रहा), डेटा के मिथ्याकरण (गलत रिपोर्टिंग और वांछित परिकल्पना या परिणाम के लिए डेटा की गलत रिपोर्टिगं या खराब करने लिए डेटा को दबाना) और साहित्यिक चोरी (अपने या अन्‍य किसी के विचारों के परिणामों को समाप्त करना) करना शामिल है । इसके अलावा, वैज्ञानिकों द्वारा गोपनीयता का उल्लंघन करने को (समीक्षा के लिए अनुदान या पांडुलिपियों से प्राप्त जानकारी का उपयोग करके) एक दुर्व्यवहार माना जाता है।

आरोपित कदाचार की जांच : चूंकचूंकि कथित कदाचार के आरोपों में कई व्यक्तियों के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, इसलिए जांच होना जरूरी है जिसे गोपनीय रखा जाता है। स्पष्टता की कमी या जानबूझकर धोखाधड़ी बनाम अनायास त्रुटियों तथा गलत व्याख्या बनाम जानबूझकर व्याख्या में मतभेद के बीच अंतर करने में विशेष सावधानी बरती जाती है। अत: कदाचार के मुद्दों की जांच के तरीके आवश्‍यक रूप से लचीले तथा प्रकरण बार निर्धारित होने चाहिए।

कदाचार की रिपोर्ट और शिकायत की प्रारंभिक प्रक्रिया:राष्‍ट्रीय प्रतिरक्षाविज्ञान संस्‍थान में अनुसंधान कदाचार (भूत या वर्तमान) की शिकायतें वैज्ञानिक समुदाय के किसी भी सदस्य (सदस्य) या अन्यत्र, सीधे निदेशक, राप्रसं. को लिखित रूप में की जा सकती हैं। यदि, हित संबंधी किसी तरह का विवाद है तो शिकायत को दो उप निदेशकों में से किसी एक उपनिदेशक या शैक्षणिक मामलों के प्रभारी वैज्ञानिक को भेजी जानी चाहिए। इन अधिकारियों द्वारा आंकलन हेतु एक प्रारंभिक मूल्यांकन किया जाएगा कि गहन जांच करने के लिए आरोप में, उचित आधार है या नहीं और इस मामले में वैज्ञानिक सहयोगियों की सलाह ली जा सकती है। अगर कोई उचित आधार नहीं पाया जाता है, तो शिकायत को खारिज कर दिया जाएगा और शिकायतकर्ता को निर्णय से अवगत कराया जाएगा। कार्यवाही की एक लिखित रिपोर्ट निदेशक सचिवालय में रखी जाएगी।

पूर्ण जांच : यदि आरोप में पूर्ण जांच की आवश्‍यकता महसूस होती है, तो जिस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत की गई है (आरोपी) को सूचित किया जाएगा और निदेशक द्वारा एक समिति की नियुक्ति की जाएगी जिसमें एक बाह्य सदस्य होगा ताकि कथित कदाचार आरोप की सत्‍यता एवं प्रकृति की तहत तक जांच की जा सके। जांच को गोपनीय रखा जाएगा और न ही शिकायतकर्ता, अभियुक्त, उनके प्रयोगशाला सदस्यों और न ही समिति के सदस्यों को जांच की कार्यवाही सर्वाजनिक करने की अनुमति है। जांच के दौरान, समिति कोई भी दस्तावेज़ या जानकारी की मांग कर सकती है, जो उस आरोप से संबंधित मानी जाती है। जांच जरूरी नहीं है कि डेटा की हार्ड अथवा सॉफ्ट प्रतिलिपियों, पांडुलिपियों के लिए दी गई अनुमति या स्‍वीकृति तक सीमित हो। जांच समिति की अभ्यर्थी की प्रयोगशाला परिसर तक असीमित पहुंच होगी और उसकी/उसके प्रयोगशाला कर्मियों से भी जांच-पूंछ कर सकती है।

समिति शिकायतकर्ता के साथ-साथ अभियुक्तों से पूछ ताछ करेगी और अभियुक्त को बचाव पेश करने और शिकायतकर्ता से प्रतिरक्षिए जांच करने की अनुमति दी जाएगी। समिति जल्द से जल्द जांच पूरी करने की कोशिश करेंगी और पूरी प्रक्रिया 90 दिन में पूरी की जाएगी। अगर कदाचार साबित हो जाता है और कार्रवाई की सिफारिश की गई है तो अभियुक्त को इसका खंडन करने का और यह स्‍पष्‍ट करने एक अवसर दिया जाएगा कि उसके प्रति ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। समिति की अंतिम रिपोर्ट, प्रस्‍तावित कार्रवाई की अनुशंसा के साथ निदेशक को प्रस्तुत की जाएगी। उचित कार्रवाई के फैसले से समिति और आरोपी दोंनों को लिखित रूप में अवगत कराया जाएगा।

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